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Meditation-Death Of Mind

"योगश्च चित्तवृत्ति निरोध"
अर्थात मन की वृत्तियों पर नियंत्रण ही योग है

Guru Dev Shri Taramani Bhai Ji is guiding seekers to elevate their consciousness.In his many years' efforts, Guru Dev has been arranging many meditation camps wherein seekers experience the deepest form of existence in his lotus feet. If any seeker wants to have an urge to meet the real existence, may contact directly to his Whatsapp no. 9919935555

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About Guru Dev Sri Taramani Bhai Ji

गुरु परिचय

भैरव: पूर्ण रूपोहि शंकर परात्मन:
भूगेस्तेवैन जानंति मोहिता शिव भामया:।

शिष्य एक समर्पित #साधक #सद्गुरु की खोज नहीं कर सकता है, कोई उपाय नहीं है आपके पास जांचने का कि कौन सदगुरु है, #सद्गुरु की खोज जितनी सरल और सहज हम समझते है, शायद उतनी आसान नहीं है, सद्गुरु की खोज एक अनंत जन्मों की प्रतीक्षा है और सत्य तो ये है सद्गुरु दिखाया नहीं जा सकता किसी को, कोई नहीं कह सकता -“यहां जाओ और तुम्‍हें तुम्‍हारा सद्गुरू मिल जायेगा।”

अधिकांशतः सांसारिक बंधनों बंधा शिष्य साधक, दावों से प्रभावित होते हैं और तब बड़ी कठिनाई निर्मित हो जाती है कि शायद ही वो जो सदगुरु है, वह दावा करे की मैं सद्गुरु हूँ, तुम मुझतक आओ, और दूसरी तरफ बिना दावे बिना कई व्यक्तियों से सलाह मश्वरा लिये हमारे पास कोई उपाय नहीं है पहचानने का ??

हम अपनी व समाज चरित्र की सामान्य नैतिक धारणाओं से प्रभावित होते हैं, लेकिन #सदगुरु हमारी चरित्र की सामान्य धारणाओं के पार होता है और अकसर ऐसा होता है कि समाज की बंधी हुई धारणा जिसे नीति नियम प्रमाण मानती है...

सदगुरु उसे तोड़ देता है क्योंकि समाज मानकर चलता है अतीत को और #सदगुरु का अतीत से कोई संबंध नहीं होता,

समाज मानकर चलता है सुविधाओं को और #सद्गुरु का सुविधाओं से कोई संबंध नहीं होता,

समाज मानता है औपचारिकताओं को, को और सदगुरु का औपचारिकताओं से कोई संबंध नहीं,

तो ऐसे में सबसे बड़ी भूल ये हो जाती है कि जो आपकी अपनी नैतिक मान्यताओं में बैठ जाता है, उसे आप सदगुरु मान लेते हैं, संभावना बहुत कम न्युनतम से भी न्यूनतम है कि सदगुरु आपकी नैतिक मान्यताओं में बैठे क्योंकि #सद्गुरु काल से परे है, समस्त जड़ता से परे है, समस्त मान्यताओं से परे है, वो साक्षात मनुष्य रूपेण ईश्वरः है और ईश्वर को कोई अपनी कल्पना अपने तर्कों अपने मान्यताओं अपने दृष्टिकोण में बांध नहीं सकता ।

शास्त्रोक्त वचनों में भी #सद्गुरु को #परमब्रह्म कहा गया , क्या उस विराट कल्पनाओं से परे , अनंत जन्मों के समस्त संचित ज्ञान से परे सर्वव्यापी परमब्रह्म को एक साधरण #जीवात्मा जिसे स्वयं का ही अस्तित्वबोध नहीं है वो क्या स्वयं से तय कर पायेगा की ये मेरे सद्गुरु हैं ???

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्‍वरः । गुरु साक्षात्‌ परब्रह्म तस्मै श्रीगुरुवे नमः ॥

शिष्य व साधक जिन धारणाओं में पले हैं, उन्हीं धारणाओं के अनुसार चुन सकते हैं लेकिन #सद्गुरु का संबंध होता है सनातन सत्य से।
साधुओं, तथाकथित साधुओं स्वघोषित गुरुओं का संबंध होता है सामयिक सत्य से ।
समय का जो सत्य है, उससे एक बात है संबंधित होना; शाश्वत जो सत्य है उससे संबंधित होना बिलकुल दूसरी बात है। समय के सत्य रोज बदल जाते हैं, रूढ़ियां रोज बदल जाती हैं, व्यवस्थाएं रोज बदल जाती हैं, दस मील पर नीति नियम भाषा समझ में फर्क पड़ जाता है, लेकिन सनातन धर्म में कभी भी कोई फर्क नहीं पड़ता।

इसलिए अति कठिन है पहचान लेना कि कौन है सदगुरु, फिर हम सबकी अपने मन में बैठी व्याख्याएं धारणाएं और कोई #सद्गुरु किसी भी तरह की धारणाओं मान्यताओं में नहीं बंधता, बंध नहीं सकता। फिर हम एक दूसरे सद्गुरु के आधार पर निर्णय कर लेते हैं कि सदगुरु कैसा होगा, वर्तमान कली काल में ज्यादातर स्वघोषित सद्गुरु हैं और प्रचार माध्यम ऐसा की किसी को भी #सद्गुरु बना दे...

एक साधक एक समर्पित शिष्य के लिये सद्गुरु की तलाश से ही उसकी साधना शुरू हो जाती है, शिष्य को पूर्ण तृष्णा से खोजना पड़ता है, उस खोज के दौरान भयंकर कष्‍ट झेलना पड़ता है, ऐसे ऐसे व्यक्तियों से मिलना होता है जिन्हें हम मार्ग में अपना गुरु बनाते चलते हैं, उन गुरुओं में से कई आगे का मार्ग खोलते हैं तो कुछ साधक की गति को ही रोक देते हैं ऐसे में तृष्णा बनी रहती है, कष्ट होता है।
कष्‍ट झेलने और खोजने के द्वारा ही हम उसे देखने के योग्‍य हो पाते हैं ।
हमारी अंतर्दृष्टि आत्मआंखे स्‍वच्‍छ हो जाती हैं, आंखों के आगे आये बादल छंट जायेंगे और बोध होगा कि यह सद्गुरू है।

सद्गुरु को पा लेना ही साधना का एक पड़ाव पार कर लेने जैसा है ।

सद्गुरु आपको चुनता है, आप उसे अपनी मान्यताओं धारणाओं से नहीं चुन सकते

"When A Disciple Is Ready Enlighten Master Appears"

अगर आप तैयार हैं खुले हुये हैं हर बन्धन से , मुक्ति ही एकमात्र जीवन उद्देश्य है तो मनुष्यरूपेण ईश्वरः कालभैरव स्वरूप सद्गुरुदेव श्री तारामणि भाई जी आपके समक्ष हैं इस काल खंड में ।

आप हमारे सद्गुरु हैं, सानिध्य में मार्गदर्शन में विशुद्ध रूप से कालभैरव साधना मार्ग की शुरुआत हुई है इस कलिकाल में, इस मार्ग पे समस्त प्रचलित साधना मार्ग आके विलीन हो जाते हैं, इस साधना मार्ग पे साधक के भटकाव समाप्त हो जाते हैं जहां वो समझ नहीं पाता कि किस दिशा में जाएं, कौन से मार्ग की साधना करें कारण ??

साधक के समक्ष तो पहले 33 कोटि देवता हैं वो ये ही सुनिश्चित नहीं कर पाता कि किसे साधें, यहां से निकलता है सात्विक तामसिक राजसिक साधना के मायाजाल में उलझ जाता है, यहां से निकल तो उसके समक्ष साधना के कई मार्ग हैं जैसे कौलिक, महाविद्या, श्री कुल, तारा कुल, काली कुल, अघोर, कपालिक, औघड़, अवधूत, नाथ सम्प्रदाय और दूसरे शैव व शाक्त साधना मार्ग व वैष्णव साधना मार्ग, इन सबमें साधक भटक सा जाता है और मुक्ति पथ से भटक जाता है सिद्धियों चमत्कार व षट्कर्म को साधना पथ का अंत मान लेता और चूंकि ये सब एक साधक की दबी हुई कुंठित अहंकार को बल देता है इसीलिए वो इन्ही सब में उलझ के रह जाता है क्योंकि उसका उसके मन पे नियंत्रण न होता है, वो अपने गहरे में छुपे हुये अहंकार को खत्म न कर पाता है भटक जाता है ।

कालभैरव साधना मार्ग का एक मात्र उद्देश्य मुक्ति है मोक्ष है, यहां सद्गुदेव "श्री तारामणि भाई जी" के सानिध्य में मार्गदर्शन में न सिर्फ विशुद्ध रूप से कालभैरव साधना कराई जाती है साथ साथ में "मन की मृत्यु" को घटित कराने वाले तीक्ष्ण ध्यान के प्रयोग कराए जाते हैं ।

एक साधक के लिये सद्गुरु का सानिध्य, साधना में होने वाले समस्त भटकाव का अंत और मन की मृत्यु उसकी मुक्ति का मार्ग प्रसस्त कर देते हैं ।

ऐसे ही मतवाले साधकों की मुक्ति मार्ग में सहायक बनने हेतु सद्गुरु "श्री तारामणि भाई जी" ने कालभैरव ध्यान संस्थान नामक पंजीकृत ट्रस्ट की स्थापना भी की है कि भटकते हुये समर्पित साधकों के मार्गदर्शन, वात्सल्य रूपी सहयोग हेतु ये ट्रस्ट सदैव एक मातृ स्वरूप में उनके साथ खड़ा रहे जिससे उनकी साधना में कोई बाधा न आये और वो सद्गुरु के सानिध्य में अपने अस्तित्वबोध हेतु इस तरह स्वयं में डूब जाएं कि काल के पार निकल जाएं मुक्त हो जाएं ।

मुक्ति की चाह रखने वाले सभी साधक अतिशीघ्र सद्गुरु सानिध्य प्राप्त करनें हेतु निम्नलिखित फ़ोन नॉ पे सम्पर्क करें और होने वाले आगामी शिविर में शामिल हो अपनी निर्णायक यात्रा शुरू करें ।

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विश्वस्य भरणाद् रमणाद् वमनात् सृष्टिस्थितिसंहारकारी परशिवो भैरवः ।।

""जय श्री कालभैरव सद्गुरुवे नमः""

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